VIDEO: बागेश्वर में खड़िया खान से हो रहा किसानों को नुकसान

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बागेश्वर: जिले का दफौट इलाका खड़िया खनन व कृषि उत्पाद के लिए जाना जाता है। लेकिन कुछ खड़िया खनन पट्टाधारको की मनमानी अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे खड़िया खनन के चलते इलाके में बहने वाली कौशल्या नदी के अस्तित्व पर ख़तरा मंडराने लगा है। एनजीटी के नियमो की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है। नदी-नालो, जल स्रोतों, रास्ते आदि को सीधे तौर पर खड़िया खनन पट्टाधारक नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बागेश्वर मुख्यालय से लगा हुआ मोहन नगर व माल्ता क्षेत्र फल और सब्जियों के लिये जाना जाता है। इस क्षेत्र से हर रोज हजारों की सब्जियां बेचने ग्रामीण बाजार आते हैं। पिछले कुछ समय से नजदीकी खड़ियां की खदानों से निकलने वाला गन्दा मिट्टी युक्त पानी उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि, खड़िया खान से निकला पानी उनके जलस्रोतों को भी दूषित कर रहा है। गंदा पानी पीने से उनके बच्चे जानवर बीमार हो रहे हैं। वहीँ किसानों ने कहा कि, बैंको से कृषि लोन लेकर हम लोग कास्तकारी करते हैं। ये लोग हमारी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। इन दिनों उनके खेतों में प्याज, टमाटर, मटर की सब्जियां उगाई जा रही है। हरी सब्जी बाजार के लिये तैयार है। ऐसे में खड़िया खान से निकला सफेद मिट्टी वाला कीचड़ उनकी सब्जियों गेहू, सरसो आदि को नुकसान पहुंचा रहा है।

वहीँ ग्रामीणों ने जल्द जिलाधिकारी से खड़िया खनन पट्टाधारको पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि, एक सप्ताह के भीतर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो ग्रामीण कलक्ट्रेट पर अनिचित्कालीन धरना प्रदर्शन को मजबूर होंगे।

ग्रामीण की शिकायत पर जिलाधिकारी रंजना राजगुरू ने खनन अधिकारी को जांच के आदेश दिये हैं। खान अधिकारी रवि बिष्ट ने बताया कि, जल्द गांव में एक टीम भेजी जायेगी। पूरी जांच के बाद दोषी पाये जाने पर खान मालिक पर कार्यवाही की जायेगी।

ऐसे में ग्रामीणों को अपनी फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है। खनन विभाग व जिला प्रशासन आंखे मुड़े बैठा हुआ है। अब देखने वाली बात होगी क्या प्रशासन कोई बड़ी कार्यवाही करता है या फिर कास्तकार यूँ ही परेशान रहते है।

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