जो जीता वही सिंकदर

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देहरादून
लागतार दो बार की हार ने पूर्व कृषि मंत्री और झारखण्ड प्रभारी त्रिवेन्द्र सिंह रावत के हौसले को तोड़ दिया था। 2017 के विधान सभा चुनावो मे डोईवाला सीट से भाजपा ने जैसे ही त्रिवेन्द सिंह रावत के नाम पर मुहर लगाई वैसे ही डोईवाला क्षेत्र के भाजपा नेताओ ने बाहरी का नारा देना शुरू कर दिया। यही नही विधान सभा चुनावो से ठीक डोईवाला विधान सभा मे एक अभिवेशन भी किया गया जिसमे कई दलो के नेताओ ने बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा उठाया क्योकि काग्रेस की ओर से मौजूदा विधायक हीरा सिंह बिष्ट भी डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के निवासी नही थे। पूरे अधिवेशन का खाका भाजपा नेताओ ने सिर्फ और सिर्फ त्रिवेन्द्र सिंह रावत के लिए बुन रखा था। लेकिन होनी को कुुछ और मंजूर भाजपा ने एक बार फिर से त्रिवेन्द्र सिंह रावत को डोईवाला विधान सभा सीट के लिए अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर उतारा , जिस वक्त चुनाव अभियान चल रहा था उस वक्त सब यही कह रहे थे कि ये त्रिवेन्द्र सिंह रावत का ये आखिरी चुनाव है अगर त्रिवेन्द्र हारते है तो उनके राजनैतिक कैरियर का अंत हो जायेगा। लेकिन किसी ने सच ही कहा है जो जीता वही सिंकदर कहलता है। जिसकी पारी का अंत नेता मान रहे थे वो जीतकर भी आया और सरताज भी बन गया।

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