लद्दाख में शहीद हुए उत्तराखंड के लाल देव बहादुर का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, उमड़ा जन सहलाब

किच्छा: लद्दाख में शहीद हुए उत्तराखंड के लाल देव बहादुर का पार्थिव शरीर आज उत्तराखंड पहुंचा। आज सुबह करीब साढ़े सात बजे लालपुर नगला मार्ग पर एक एंबुलेंस आकर रुकी जिसमे शहीद देव बहादुर का पार्थिव शरीर था। यह जानकारी मिलते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बच्चे, बूढ़े, जवानों के साथ साथ बड़ी संख्या में महिलाएं शहीद के दर्शन को पहुंच गए। देखते ही देखते पूरा इलाका भारत माता की जय के साथ साथ जब तक सूरज चांद रहेगा देव तुम्हारा नाम रहेगा, वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। लोग शहीद के अंतिम दर्शन के लिए मकान की बालकनी व छतों पर चढ़ गए। करीब दो घंटे तक सैन्य वाहन के इंतजार में एंबुलेंस लालपुर पर ही रुकी रही। सेना का वाहन रामेश्वरपुर गांव पहुंचा और एंबुलेंस से पार्थिव देह को सैन्य वाहन में रखा गया।

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शहीद देव बहादुर का शव तीन दिन के बाद उनके गांव पहुंचा। स्थानीय लोगों और नौजवान जुलूस की शक्ल में सैन्य वाहन को गांव तक ले गए। ग्राम गोरीकलां के निकट शमशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ शहीद देव बहादुर का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि शहीद के पिता शेर बहादुर ने दी। 

तिरंगे में लिपटे हुए भाई के शव को देखकर बहन बिलख पड़ी। बहन बार-बार चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि भइया तुम खुद चल कर क्यों नही आ रहे हो। बहन गीता ने बड़े अरमानों से भाई की कलाई के लिए राखी खरीदी थी। लेकिन उसे क्या पता था कि रक्षाबंधन आने से पहले ही उसका प्यारा भाई देश के लिए बलिदान हो जाएगा। भाई की पार्थिव देह ताबूत में देखकर सुधबुध खो बैठी गीता ने होश आने पर राखी को ताबूत पर बांध दिया। 

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