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भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है: सेना प्रमुख

नई दिल्ली: सेना प्रमुख बिपिन रावत ने खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि सेना आतंकवादियों के भारतीय इलाकों में घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह से सक्षम है।

उन्होंने कहा कि भारत ने किसी भी तरह कोई क्षेत्रीय महत्‍वकांक्षा नहीं रखी है लेकिन इसका मकसद आर्थिक तरक्‍की के लिए बाह्य और आतंरिक सुरक्षा की आदत डालना है। जनरल बिपिव रावत ने यह बात गुरुवार को एक सेमिनार में कही जो इंडो-पैसेफिक रीजन से जुड़ी चुनौतियों और इसकी संभावनाओं पर आधारित था। उन्होंने कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति में साल 2018 बड़ा महत्वपूर्ण रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों की परिवर्तनकारी और विघटनकारी प्रकृति पहले से ज्यादा स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि इस साल में भारत-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति पर विभिन्न राज्यों और व्यापारिक समझौतों पर लगाए प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ा है तो दुनिया में प्रमुख व्यापार कोरियाई द्वीप में शांति वार्ता की राह खुली है, वहीं, इस्लामिक स्टेट का अपना कब्जा खोना भी काफी महत्वपूर्ण घटनाएं हैं।

जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘भारत-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक शक्ति संतुलन जारी है और यह आने वाले भविष्य में भी लगातार ऐसा रहने वाला है। कई हितधारकों को देखते हुए एक सतत संघर्ष जारी है। एक भारतीय परिप्रेक्ष्य से यदि देखा जाए तो हमने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है।’

सेनाध्यक्ष ने कहा कि हमारा लक्ष्य एक अनुकूल आंतरिक और बाहरी सुरक्षा वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, ‘हमारी सुरक्षा नीति 2 बेसिक आधारभूतों पर काम करती है। हमें किसी क्षेत्र को अपने क्षेत्र में शामिल करने की कोई महत्वकांक्षा नहीं है और हम अपने विचारों को दूसरों पर थोपना नहीं चाहते। हमारा लक्ष्य एक अनुकूल आंतरिक और बाहरी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। जिससे कि अबाधित रूप से सामाजिक प्रगति और सामाजिक-राजनीतिक विकास हो सके।’

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